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About Me

ग्रामीण परिवेश में पल कर बड़े हुए और स्नातक शिक्षा के लिए धारानगरी का द्वार खटखटाया ,राजा भोज की इस पावन नगरी के सानिध्य में गणित के सूत्रों को हल हल करते करते स्नातकोत्तर उपाधि के बाद महाँकाल की नगरी में कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग से
दो चार करते हुए वर्दी धारण कर ली तब से हम इसका मान बढ़ाने का हर प्रयास कर रहे है औऱ ये भी हमारी शान बानी हुई है । 
पूज्य पिताजी की हिंदी साहित्य की साधन गुणसूत्रों के माध्यम से हमारे शोणित का भी हिस्सा बन गयी है । समाज के सकारात्मक पक्ष को उजागर करने एवं समाज कल्याण की दृष्टि से लेखनी को शिरोधार्य किया है । हर विषय को देखने के कई दृष्टिकोण होते है। अपने दृष्टिकोण को आपके सम्मुख रखने के उद्देश्य से ब्लॉग को '"मेरे विचार से" से नाम दिया है । आशा है विचारो के आदान-प्रदान की इस प्रकिया में आपका अनवरत सकारात्मक एवं सक्रिय सहयोग मिलता रहेगा । असहमति के स्वर भी सहर्ष स्वीकार्य है ।शत शत अभिनंदन ।
- योगेश्वर शर्मा 

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नत्थू लाल की टेंशन

कल नत्थूलाल जी मिले, हाथ में पेपर पकड़े बड़े उदास, गमगीन से दिख रहे थे । हमने पूछा...अरे भाई आज आपके गुलाब से खिले चेहरे पर उदासी का पाला कैसे पड़ गया ? नत्थूलाल जी बोले...आपने शायद पेपर नहीं पढ़ा, हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत का नंबर बहुत पीछे बतलाया गया है । हमने कहा ...तो ? नत्थूलालजी आश्यर्यचकित होकर बोले...आप कैसी बात करते हो शर्माजी ,ये खबर पढ़ कर 2 दिन से मैं निराशा और क्रोध के भँवर में चक्कर लगा रहा हूँ ओऱ आपको कोई फर्क ही नही पड़ रहा है। आप देख नहीं रहे,आजकल हम भारतीय कितने खुश दिखते है । आप चाहो तो कहीं भी,कभी भी देख लो ।फेसबुक,व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम आदि आदि,ख़ुश लोगों के पोस्टो से पटे पड़े है । कोई भी पोस्ट देख लो ,हर जगह आदमी खुश ही नज़र आता है,मंदिर में,मस्ज़िद में,कार में,बस में,ट्रेन में,प्लेन में,साईकल पर,घर में,टॉयलेट में, दुकान में,होटल में,पब में,बिस्तर पर,जमीन पर,आसमान में,नदी में,नाले में ,पेड़ पर,फूल पत्ती के साथ,जीन्स में,धोती में,घूँघट में। अरे दिन तो छोड़ो रात में 1 बजे हो,तीन हो या पांच बजे हो,जब देखो तब आदमी हमेशा खुश दिखते हुए फ़ोटो चेपता है ।और तो और आदमी इतन...

क्या कोई मुझे उस मिट्टी का पता बतला सकता है जिससे भगवान् ने बहन को बनाया ।

क्या कोई मुझे उस मिट्टी का पता बतला सकता है जिससे भगवान् ने बहन को बनाया ।उस मिट्टी में ऐसा क्या है जो एक ही जनक-जननी से सृजित होने के बावजूद उसे हम भाई लोगो से  उत्कृष्ट बना देता है।उसे अपने भाइयों से श्रेष्ठ कहलाने की आकांक्षा या अभिलाषा नहीं होती है वरन् उसके कर्म ही उसे अग्रगन्य बना देते है। बहन , ऐसा क्यों होता है ,मम्मी-पापा रहते हमारे पास में है , उनका दिल धड़कता हमारे यहाँ है किंतु धड़कन तेरे यहाँ सुनाई देती है। अनमने हम लोग होते है पर उसका सबसे पहले एहसास तुझे होता है और अलभोर में तेरा फ़ोन इसकी पुष्टि कर देता है।क्यों पापा बीमारी में हम लोगो के पास होने के बावजूद तुझे ही याद करते है। तू ऐसा कैसे कर लेती है,कि हम भाईयो की या मम्मी-पापा की बीमारी का सुन कर अपना पेट,पीठ,कमर दर्द या बुखार सब भूल कर दौड़ी चली आती है या हर घंटे खैरोखबर लेती रहती है। तू इतने रूप कैसे धारण कर लेती है ,कि हम भाईयो में से किसी के भी डिप्रेस होने पर सबसे बड़ी मोटिवेटर बन जाती है,बीमार होने पर डॉक्टर का एप्रिन पहन लेती है और किसी से झगड़ा होने पर रुस्तमे हिन्द बन जाती है।तू ,हमेशा हम लोगो का भल...

अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूं तो इंक़लाब लिखा जाता है - भगत सिंह

जिनके बल पर हिमालय का शीश गर्वोंमत्त रहता है,जिनकी भुजाओ की ताकत से झेलम उफ़ान मारती है । सोमनाथ के सागर का रौद्र रूप जिनके साहस का प्रतिमान है, ऐसे होते है कुछ विरले । ये लोग बड़े अलहदा होते है,विलक्षण,विचित्र,अलग ही प्रतिभा लिए , यूँ कहे कुछ अलग ही मिट्टी के बने होते है । अलग ही तरीके का जीवन जीते है, भस्म कर देने वाली रेत में भी मुस्कराते है तो हाड़ गला देने वाली बर्फ़ खुद पिघल कर जहाँ पानी बन जाती है ये फ़ौलादी वहाँ भी जमे रहते है । ग़लनांक एवं क़्वाथनांक की परिभाषा से परे होते  है ये लोग । आख़िर कौन है ये औऱ क्या पहचान है इनकी । ये माटी के लाल होते है , माटी ओढ़ते है ,माटी पहनते है औऱ माटी के लिए मर मिटने को हरदम तत्पर रहते है । माटी के लिये शीश बलि को अपनी आन बान शान समझते है औऱ उसके लिए होड़ लगाते है । किसी यश की चाह नही होती है इनको । इनका धर्म, जाति,भाषा सबकुछ माटी होता है फिर चिंदीचोरो की तरह इनके पास लड़ने, आगज़नी करने ,तोड़फोड़ करने का समय कहाँ ?? इनको अपनी अपनी निष्ठा प्रमाणित करने के लिए किसी के सर्टिफ़िकेट की आवश्यकता नही होती वरन वे स्वयं प्रमाण होते है देश के प्रति निष्ठा का...