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आख़िर तुम होते हो कौन मुझे इस तरह परेशान करने वाले, दुःखी, तनावग्रस्त ,पीड़ित,चिंतित,विचलित करने वाले ?

आख़िर तुम होते हो कौन मुझे इस तरह परेशान करने वाले, दुःखी, तनावग्रस्त ,पीड़ित,चिंतित,विचलित करने वाले ? तुम्हे अधिकार किसने दिया मेरे मन ,विचारो को बलात अधिकृत करने का   । तुम जो चाहो वह मै करता हूँ, तुम जिसमे ख़ुश होते हो वो ही मेरी प्रसन्नता का साधन हो जाता है , तुम्हारा दुख तुमसे अधिक मुझे पीड़ा देता है इसके बावजुद तुम कब रुष्ट हो जाओ कहा नही जा सकता । इतना सब होने के बावजूद  मैं हमेशा तुम्हारी प्रतिक्रिया का ही फ़िक्रबन्द रहता हूँ । कल ही की तो बात है जब बॉस मुझे बोल रहे थे 'त ुमने काम तो किया पर ओर बेहतर तरीके से हो सकता था' ,इस पर मैने देखा तुम मेरे जिगरी दोस्त के रूप में मुस्करा रहे थे । तुम्हे एहसास भी है तुम्हारी इस हरकत से मैं कितना दुःखी औऱ तनावग्रस्त हो गया था, कि बॉस ने क्या बोला यह भूल कर तुम्हारी मुस्कान रात भर शूल की तरह चुभती रही । तुमने 2 दिन बाद में माफी मांग कर बोल भी दिया था कि किसी ओर कारण से तुम मुस्कराए थे , बॉस ने क्या बोला ये तो तुम सुन भी नही पाये थे,पर उससे क्या , 2 दिन का चेन तो तुम्हारे कारण खो ही चुका था चाहे भ्रम या शंका के कारण ही ऐसा क्यों ह...

आधी-आधी राहें अपनी, पूरी मंजिल पाना है।

अभी करवाचौथ की पूजा के बाद हम उज्जैनगामी होने के लिए ट्रेन में सवार होकर बैठे ही थे कि व्हाट्सएप पर श्रीमती रिंकू शर्मा जी का एक मर्मस्पर्शी काव्यात्मक संदेश मिला । आप भी देखिये.... आधी-आधी राहें अपनी, पूरी मंजिल पाना है। आधी दूरी तय की हमनें, आधा उन्हें ही आना है। आधी रातें,आधी बातें, आधे सब अफ़साने है। अपनी बातें बोल चुके हम, आधी उन्हें बताना है। आधी वारिश,आधी धूप ये, आधे आँगन में खिली हुई। आधी हवा के आधे झोंकों से ये, आधी खिड़की खुली हुई । आधे-आधे ख्वाब जोड़कर, पूरा उन्हें सँजोना है। आधे ख़ुद ही मान गए हम, आधा उन्हें मनाना है। वहीं कहीं चुपके से आकर, साथ में उनकी खुशबू लाकर। आधे चाँद की आधी किरणें, आधे बिस्तर पसर गई हैं। इंतज़ार है उन किरणों का , जाकर दूर जो छिटक गई । लेकर आधी उन किरणों को उन्हें हमे मानना है आधी दूर पहुँच गए वो, आधा और भी आना है। आधी आंखें मुदीं हुई है, आधी अब भी खुली हुई हैं। खुली हुई उन आँखों से, इंद्रधनुष बनाना है । आधी दूरी तय की हमनें, आधा उन्हें ही आना है। ......... संदेश में समाहित संदेश समझा तो प्रतिउत्तर देने के लिए ...

क्या कोई मुझे उस मिट्टी का पता बतला सकता है जिससे भगवान् ने बहन को बनाया ।

क्या कोई मुझे उस मिट्टी का पता बतला सकता है जिससे भगवान् ने बहन को बनाया ।उस मिट्टी में ऐसा क्या है जो एक ही जनक-जननी से सृजित होने के बावजूद उसे हम भाई लोगो से  उत्कृष्ट बना देता है।उसे अपने भाइयों से श्रेष्ठ कहलाने की आकांक्षा या अभिलाषा नहीं होती है वरन् उसके कर्म ही उसे अग्रगन्य बना देते है। बहन , ऐसा क्यों होता है ,मम्मी-पापा रहते हमारे पास में है , उनका दिल धड़कता हमारे यहाँ है किंतु धड़कन तेरे यहाँ सुनाई देती है। अनमने हम लोग होते है पर उसका सबसे पहले एहसास तुझे होता है और अलभोर में तेरा फ़ोन इसकी पुष्टि कर देता है।क्यों पापा बीमारी में हम लोगो के पास होने के बावजूद तुझे ही याद करते है। तू ऐसा कैसे कर लेती है,कि हम भाईयो की या मम्मी-पापा की बीमारी का सुन कर अपना पेट,पीठ,कमर दर्द या बुखार सब भूल कर दौड़ी चली आती है या हर घंटे खैरोखबर लेती रहती है। तू इतने रूप कैसे धारण कर लेती है ,कि हम भाईयो में से किसी के भी डिप्रेस होने पर सबसे बड़ी मोटिवेटर बन जाती है,बीमार होने पर डॉक्टर का एप्रिन पहन लेती है और किसी से झगड़ा होने पर रुस्तमे हिन्द बन जाती है।तू ,हमेशा हम लोगो का भल...

अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूं तो इंक़लाब लिखा जाता है - भगत सिंह

जिनके बल पर हिमालय का शीश गर्वोंमत्त रहता है,जिनकी भुजाओ की ताकत से झेलम उफ़ान मारती है । सोमनाथ के सागर का रौद्र रूप जिनके साहस का प्रतिमान है, ऐसे होते है कुछ विरले । ये लोग बड़े अलहदा होते है,विलक्षण,विचित्र,अलग ही प्रतिभा लिए , यूँ कहे कुछ अलग ही मिट्टी के बने होते है । अलग ही तरीके का जीवन जीते है, भस्म कर देने वाली रेत में भी मुस्कराते है तो हाड़ गला देने वाली बर्फ़ खुद पिघल कर जहाँ पानी बन जाती है ये फ़ौलादी वहाँ भी जमे रहते है । ग़लनांक एवं क़्वाथनांक की परिभाषा से परे होते  है ये लोग । आख़िर कौन है ये औऱ क्या पहचान है इनकी । ये माटी के लाल होते है , माटी ओढ़ते है ,माटी पहनते है औऱ माटी के लिए मर मिटने को हरदम तत्पर रहते है । माटी के लिये शीश बलि को अपनी आन बान शान समझते है औऱ उसके लिए होड़ लगाते है । किसी यश की चाह नही होती है इनको । इनका धर्म, जाति,भाषा सबकुछ माटी होता है फिर चिंदीचोरो की तरह इनके पास लड़ने, आगज़नी करने ,तोड़फोड़ करने का समय कहाँ ?? इनको अपनी अपनी निष्ठा प्रमाणित करने के लिए किसी के सर्टिफ़िकेट की आवश्यकता नही होती वरन वे स्वयं प्रमाण होते है देश के प्रति निष्ठा का...

बाबूजी,आप ही बताओ

बाबूजी,आप ही बताओ, दो बच्चो का ये अधपकी आयु वाला धवलवर्णी केश सँजोये बाप, विपदा की महादशा में आज भी आपकी छाया के आश्रय तले ही सुकून क्यो पता है ? आज भी जब तनाव ,चिंता,अवसाद की उत्तुंग तरंगे मुझे अपने आग़ोश में लेने के लिये पूर्ण संवेग से झपटती है तो पत्नी,बच्चो की मोटरबोट,दोस्तो के स्टीमर को छोड़ आपकी छोटी सी कश्ती में बैठ कर ही पार होने के प्रति मन इतना आश्वस्त क्यो रहता है ? ये केवल क्रोमोजोम का लोचा तो नही लगता ? मुझे तो ये आपके अवर्णनीय , अकथनीय प्रेम की चुम्बकीय शक्ति  का एक अंश मात्र जान पड़ता है । आज भी जब आपकी आवाज सुनता हूँ ..."कैसे हो बेटा "," ओर क्या एसपी साहब ", " चिंता मत करो पंडित " , तो सकारात्मक ऊर्जा का ओरा बन जाता हैं । चिंता चुटकियों में वाष्पीकृत हो जाती है क्योकि मै जानता हूँ आपने जब एक बार कोई समस्या को जान लिया तो आप ईश वंदना से विपत्तिनाश बीजक लेकर ही मानेंगे। कार्य कर ऊर्जित होने की कला,मन के विपरित विचारो को भी सम्मान देने के आपके तरीके,विवाद का मौन रह कर प्रतिकार करने की आपकी सिध्दि को आज तक आत्मसात करने की चेष्ठा कर रहा हूँ । आपके...

जीवन मे इमरजेंसी सेफ्टी वाल्व पर दृढ़ता से भरोसा रखना नितांत आवश्यक है .

जीवन मे इमरजेंसी सेफ्टी वाल्व पर दृढ़ता से भरोसा रखना नितांत आवश्यक है ... विगत दिनों भोपाल में एक ट्रेनिंग के दौरान उत्तरप्रदेश के एक अनुभवी ,विद्वान एवं व्यवसायिक रूप से दक्ष पुलिस अधिकारी से साक्षात्कार का सुयोग मिला , इस दौरान प्रशिक्षण के दूसरे दिन अचानक से उन्हें ख़बर मिली कि उनके एक प्रिय कनिष्ठ समकक्ष पुलिस अधिकारी ने दुर्भाग्यपूर्ण रूप से स्वयं को समयपूर्व काल के हवाले कर दिया है ,उस पूरे दिन वो स्वाभाविक रूप से उद्विग्न रहे औऱ रात में उन्होंने अपनी संवेदनाओ को एक अ त्यंत मार्मिक पोस्ट के माध्यम से अभिव्यक्त किया । इस वाकये को गुजरे लगभग 2 सप्ताह ही हुए थे,कि एक अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति के द्वारा अप्राकृतिक रूप से जीवन त्याग कर मृत्युआलिंगन का समाचार पढ़ने को मिला । समाज के दो लब्धप्रतिष्ठित व्यक्तियों का यू अंतिम रास्ते का चयन करना व्यथित तो करता ही है सामाजिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह भी लगाता है । मेरे उन मित्र की पोस्ट के कुछ अंश शेयर कर रहा हूँ .... सर्वप्रथम उन्होंने अपने मित्र के चरित्र के संबंध में लिखा है .....(संबंधित अधिकारी का नाम)..........का नाम लेते ही ऊर्जा, उत्साह और...